औदीच्‍य बन्धु को अपनाईये ।

अपनों से मिलना हमें चिरंजीवी सुख देता है । हम यात्रा में हो या रास्‍ते में कोई स्‍वजातीय बन्‍धु मिल जात है तो हमें बडी प्रसन्‍नता होकर आत्‍मीय भाव से हम उससे बातचीत करते हैं । इसी प्रकार अखिल भारतीय औदीच्‍य महासभा का मुख पत्र है - औदीच्य बन्धु  , जो हमें महासभा की गतिविधियों के साथ सामाजिक गतिविधियों से परिचित कराने का सशक्‍त माध्‍यम है,  को भी उसी आत्‍मीय भाव से देखना होगा।
          वर्तमान समय में साहित्‍य सरोवर से अनेकों पत्रिकायें दुर्लभ और बहूमूल्‍य विचारों को लेकर बाहर आ रही है , वे पढी जाती है  और उनमें उपलब्‍ध ज्ञान को बटोर कर सहेजा जाता है किन्‍तु समाज के व्‍दारा समाज के लिये समाज के हितार्थ प्रकाशित होने वाली पत्रिकाओं के पठन पाठन में सामाजिक सदस्‍यों की रूचि का अभाव दिखाई दे रहा है।
 यह अवश्‍य है कि समाज की पत्रिकाओं में  फाइव स्‍टार  होटल के भोजन जैसा स्‍वाद  जो क्षणिक सन्‍तुष्‍टी देने वाला होता है नहीं मिलता किन्‍तु उन सामाजिक पत्रिकाओं में सामाजिक सूचनाओं के साथ अन्‍य कई विविध जानकारीयों को खजाना भरा हुआ होता है। ऐसी पत्रिकाओं में रूखा सुखा खाय के ठण्‍डा पानी पीव जैसी सन्‍तोष देने वाला पोष्टिक तत्‍व समाया हुआ रहता है। आजकल हमारी सामाजिक सोंच में जंग सा लगता जा रहा है । बिना चिन्‍तन मनन किये हम नकारात्‍मक सोंच के उदगार प्रगट कर रहे हैं कि समाज में क्‍या रखा है , समाज ने हमको क्‍या दिया,सामूहिक आयोजनों से क्‍या फायदा आदि आदि ।
            ऐसा ही कुछ विचार मन्‍थन अ;भा;औदीच्‍य महासभा के मुखपत्र  औदीच्य बन्धु    के संबंध में उन लोगों व्‍दारा किया जाता है कि  औदीच्य बन्धु   में कोई पठनीय सामग्री नहीं आती है । यह सोच उन लोगों का हो सकता है जिन्‍हे समाज और समाज की पत्र पत्रिकाओं से कोई लेना देना नहीं है। हम  औदीच्य बन्धु   के भूतकाल से लगायत वर्तमान काल की यात्रा पर  द्रष्टि डाले तो इस पत्र का उपरी आवरण जो मनमोहक है ही अन्‍दर के 36 प्रष्‍ठों पर चिन्‍तन मनन करने योग्‍य  आलेख , श्रेष्‍ठ सम्‍पादकीय,समाचार, वैवाहिक विज्ञापन, बधाई संन्‍देश आदि अन्‍यान्‍य सामग्री के साथ  गत 88 वर्षो से निरन्‍तर प्रकाशित हो रहा है, और अब समाज में लोकप्रिय भी है। इसके माध्‍यम से लेख  ,वैवाहिक विज्ञापन के माध्‍यम से युवा युवतियों को जीवन साथी चुनने का अवसर,समाज में चल रही गतिविधियों की जानकारी, शोक समाचारों के माध्‍यम से शोक संवेदना संदेश भेजने की सुविधा आदि  उपलब्‍ध हो रही है। 
      बस समाज की इस सशक्‍त पत्रिका के लिए कहीं कमी परि‍लक्षित हो रही है तो वह है हमारे समाज के विद्वानों , कलमकारों के विचारों की जो अन्‍य पत्रिकाओं के लिये अपने लेख भेजने के लिए रातदिन एक किये हुए है किन्‍तु अपने सशक्‍त विचारों को समाज के साथ बाटने को तैयार नहीं है। जबकि औदीच्‍य बन्‍धु उनके विचारों को स्‍पर्श करने  के लिए लालायित रहता है। आशा है समाज के विद्वान जन समाज को अपनी लेखन शैली से अवश्‍य अवगत करावेंगें ।
        वैवाहिक विज्ञापनों में विज्ञापन दाता को अपना पूरा पता एवं सम्‍पर्क नम्‍बर अवश्‍य लिखना चाहिए जिससे सम्‍पर्क करने में सुविधा होगी । केवल दूरभाष नम्‍बर देना समस्‍या को और बढाता है
                औदीच्‍य बन्‍धु औदीच्‍य समाज का एकमात्र मासिक पत्र है किन्‍तु समाज की जनसंख्‍या को देखते हुए इसकी सदस्‍य संख्‍या बहुत ही कम है। इसके लिए अ; भा; औदीच्‍य महासभा की तहसील स्‍तरीय इकाई तक के प्रत्‍येक सदस्‍यों को प्रत्‍येक परिवार से सम्‍पर्क कर उन्‍हे सदस्‍य बनाना होगा ।  औदीच्य बन्धु   भी हर घर की देहरी को लांघ कर कल आज और कल की पीढी के मन में समा जाना चाहता है।
            यह समाज का पत्र है और पाठक को इसमें जो अच्‍छाइयां या कमिया दिखे वह बेबाक रूप से सम्‍पादक के ना पत्र लिख कर अपने विचार भेज सकता है । लाभदायक विचारों पर अवश्‍य अमल किया जावेगा । औदीच्‍य बन्‍धु को अपना सहोदर मान कर आत्‍मीय स्‍वागत करें । जय गोविन्‍द माधव।
                                                                                            उघ्‍दव जोशी  उज्‍जैन


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औदीच्य बन्धु     सहस्त्र औदिच्य  ब्राम्हण  समाज के हित में प्रसारित    अखिल भारतीय औदिच्य महासभा का मुखपत्र  मूलत: प्रकाशित पत्रिका

1 टिप्पणी:

Brahmtej ने कहा…

In publication of Audichya Bandhu make it very popular for unite Audichya Sahstra Brahmin community in India,
Also very much attracting Youth of Audichya Sahstra Brahmin for more integrating about History of Forefather living in Siddhpur town .
Cast is Super intelligence perfact vedic culture ,and puran, sastra and Veda applications in Social,mankind hazards getridoff.