अमर शहीद श्री बलराम जोशी

अमर शहीद बलराम जोशी
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मात्र 24 वर्ष की उम्र में देश पर मर मिटने की भावना कौन रखता है किन्तु औदीच्य समाज के गौरव बलराम जोशी ने अपनी शहादत से यह करिश्मा कर दिखाया। कहते हैं व्यक्ति का महत्व उसकी मृत्यु पर ही पता चलता है और बाबा महाकाल की नगरी उज्जयिनी में देखा बनते हुए एक ऐसा इतिहास शहीद बलराम जोशी की महायात्रा में ।

श्री राधेश्याम जी जोशी जो कि मूलतः तराना के निवासी होकर वर्तमान में महानन्दानगर उज्जैन में निवासरत है, के इकलौते बेटे बलराम जोशी में बचपन से ही कुछ कर दिखाने का सपना था और बलराम ने अपने सपने को साकार रूप देने के लिए देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी ओढ ली। ग्वालियर के समीन टेकनपुर में दो वर्ष के सख्त प्रशिक्षण के पश्चात सीमा सुरक्षा बल में उप निरीक्षक के पद पर बलराम जोशी की नियुक्ति की गई और उन्हें तैनात किया गया काश्मीर के उस राजौरी क्षेत्र में स्थित नाल चैकी पर जो कारगिल युध्द के पहले तक पाकिस्तानी सेना के कब्जे में थी । कारगिल युध्द में जब यह चैकी बलराम जैसे कई मुस्तैद प्रहरियों ने पाक के कब्जे से छुडा ली तब से ही यह चैकी ऐसे ही सजग प्रहरियों के सुरक्षित हाथों में रही । उल्लेखनीय है कि नाल चैकी पाकिस्तानी सीमा से सटी हुई है। यहां गोलाबारी हमेशा चलती रहती है। इस बात की पुष्टि खुद बलराम ने अपनी उज्जैन यात्रा के समय अपने माता पिता से मिलने पर की थी । जुलाई में जब बलराम अपनी ड्यूटी पर वापस नाल चैकी पर गया । वहां पाकिस्तानी सैनिकों राकेट लांचरों से लगातार हमले करते रहे मगर उज्जैन का यह जाबांज अधिकारी एक दो नहीं पूरे 12 घन्टे तक अपने एक और साथी सहित दुश्मनों से लोहा लेता रहा ! उसी दौरान उसने दुश्मन के पाँच सैनिकों को अपना शिकार बनाया । मगर किसी लांचर से हुआ एक हमला बलराम के लिए काल बन कर आया। वीर बलराम ने अपनी जान दे दी मगर देश की आन पर आँच नहीं आने दी ।

आजादी के बाद उज्जैन के इतिहास में पहली बार किसी ने सीमा पर अपना बलिदान दिया और यह बलिदान औदीच्य ब्राहमण समाज के इस वीर सपूत ने दिया । शहीद बलराम जोशी की अन्तिम यात्रा में जन सैलाब इतना अधिक था कि कही पैर रखने की जगह नही बची थी ,जिधर देखो उधर जनता ही जनता दिखाई दे रही थी । वह द्रश्य बडा ही मार्मिक और दिल को दहला देने वाला था जब शहीद के वृध्द पिता श्री राधेश्याम जोशी ने अपने इस कुल दीपक को चिता पर रखने के बाद सैल्यूट किया ! समूचा औदीच्य ब्राहमण समाज अपने इस गौरव अमर शहीद बलराम के पिता श्री राधेश्याम जोशी एवं वीर माता सरजूबाई को सैल्यूट करता है जिन्होने ऐसे रणबांकुरे को जन्म दिया जो भारत माता के लिए मर मिटा !

शहीद बलराम की स्मृति को संजोये रखने के लिए शहीद पार्क फ्रीगंज में शहीद की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूरा जीवन परिचय एवं शहीदी की गाथा अंकित की गई है। यहां प्रति वर्ष शहीद के जन्म दिवस तथा शहादत दिवस को पुष्पमाला पहना कर श्रध्दांजली अर्पित की जाती है । इस अवसर पर जन समुदाय के साथ शहीद बलराम जोशी का पूरा परिवार

उपस्थित रहता है । औदीच्य ब्राहमण समाज की और से अपने इस सपूत के प्रति विनम्र श्रध्दांजली !

2 टिप्‍पणियां:

snehalata vyas ने कहा…

Jab ye hadsa hua tha tab ki bhi muze smarti he, par yah jaankar aur bhi santosh mila ki unaki smarti me unki pratima bhi lagai gai he.Aap ne yah nahi bataya ki unke matapita ki dekhbhal kaun kar rahe hain? Desh ke aise sapoot ko hamara bhi naman he.

snehalata vyas ने कहा…

Jab ye hadsa hua tha tab ki bhi muze smarti he, par yah jaankar aur bhi santosh mila ki unaki smarti me unki pratima bhi lagai gai he.Aap ne yah nahi bataya ki unke matapita ki dekhbhal kaun kar rahe hain? Desh ke aise sapoot ko hamara bhi naman he.